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श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए मजदूरों को बस से भेजा अपने गृह जिले

खबरगुरु (रतलाम) 8 मई 2020। लॉक डाउन में दूसरे राज्यों में फसे मजदूरों को अपने गृह जिले में भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन का संचालन किया गया। गुजरात में लॉक डाउन में फसे मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के मजदूर 8 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से रतलाम आए। 12 सौ से अधिक मजदूर रतलाम पहुंचे। प्रशासन ने मजदूरों को अपने गृह जिले में भेजने तक की पूरी व्यवस्था कर रखी थी पुलिस और प्रशासन की टीम मौजूद थी। [divider]

मजदूर श्रमिक ट्रैन से रतलाम एंट्री पॉइंट पर उतरे । और यहाँ से बसों से अपने गृह जिलों खरगोन, खंडवा, बड़वानी ,धार, झाबुआ इत्यादि की ओर रवाना हुए। इस दौरान रतलाम रेलवे स्टेशन पर कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान द्वारा खड़े रहकर सतत व्यवस्थाएं देखी। कलेक्टर और एसपी भी सतत निगरानी करते हुए व्यवस्था में लगेे कर्मचारियों को निर्देशित करते रहे। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान मजदूर परिवारों के मेडिकल चेकअप, उनके भोजन इत्यादि की व्यवस्था के लिए मौजूद अमले को सतत दिशा निर्देशित करती रही। मजदूरों को भोजन, पानी, बिस्किट देकर रवाना किया गया। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, नगर निगम, शिक्षा विभाग के सभी अधिकारियों को जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसका वे निर्वाह करते हुए नजर आए। [divider]

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कलेक्टर रुचिका चौहान द्वारा खड़े रहकर सतत व्यवस्थाएं करवाई जा रही थी, जब बड़वानी जिले के एक मजदूर अमर सिंह के परिवार के साथ उनके बच्चे को कलेक्टर ने बगैर मास्क के देखा तो मास्क मंगा कर अपने हाथों से बालक वजे सिंह को मास्क पहनाया।

इस दौरान सभी मजदूरों और बच्चों को मास्क वितरित किए गए। पुलिस और प्रशासनिक महकमा सभी को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए दिखा। सोशल डिस्टेंसिंग के लिए बनाए गए गोले पर बैठकर मजदूर अपनी अपनी बसों का इंतजार करते हुए दिखे। [divider]

हालांकि बस में चढ़ने को लेकर मजदूरों ने सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं किया। बसों में बैठने की जल्दी को लेकर सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए।[divider]

शिक्षा विभाग के कमर्चारी भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनें। 3-3 के ग्रुप में 9 दलो ने अपनी सेवाएंं दी। शिक्षक हरिराम ओहरी और सुरेश हारी ने चर्चा में बताया कि विभिन्न राज्यों से आए मजदूरों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए 9 दल बनाए गए थे। दल में मौजूद सभी सदस्य सुरक्षात्मक तरीके से कीट पहने हुए थे। एक दल में तीन व्यक्ति थे। एक की जिम्मेदारी स्कैनिंग की, दूसरे की नाम पता लिखने की तथा तीसरे की हैंड सेनीटाइजर की रही। सभी मजदूरों एवं सेवा देने वाले सभी तैनात को छाछ का वितरण किया गया।

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